आते जाते अक्सर मिला करते थे वोह सुबह शाम मेरा सलाम लेते थे वोह दूर से आते देख सांस रुक जाती थी मेरी जान जब गुजरती थी तो जान आती थी एक दिन न जाने, कहाँ गुम गए वोह बिखरी साँसे, अधूरी धड़कने छोड़ गए वोह अब तो दर्द दिल में, सदा उनका रहता है अधूरे खुले दरवाज़ों में, सदा उनको ढूंढ़ता रहता है कदम अक्सर, उन्ही रास्तो पर चल पड़ते है के काश मिल जाए, वोह कही तो करार आये ज़िन्दगी की दौड़ में, अब आगे निकल गया हूँ अब खवाबों में, तुझे सलाम कर लेता हूँ जब पकड़ते हैं जाम, तेरा नाम लेता हूँ कभी गुजरते हैं उन रास्तो से, तो दिल अभी भी धड़कता है के काश मिल जाए, वोह कहीं तो करार आये उम्र की इस देहलीज़ पर,खवाबों में अब भी मुलाकात होती है तुझसे मिलने की आस में,अब भी उधर जाना होता है अपने जनाजे का रास्ता,उधर से ही निकलूंगा की काश मिल जाए वोह यहीं,तो जाते जाते करार आये मैं समझ गया यह जिस्मानी नहीं,रूहानी रिश्ता है बैठा हूँ तेरे इंतज़ार में,खुदा के दर पे तू कहीं भी हो तेरी रूह,मुझसे मिलने आएगी ज़रूर और मेरा करार लाएगी ज़रूर ...