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मिल जाए वोह कही तो करार आये

आते जाते अक्सर मिला करते थे वोह
सुबह शाम मेरा सलाम लेते थे वोह
दूर से आते देख सांस रुक जाती थी
मेरी जान जब गुजरती थी तो जान आती थी

एक दिन न जाने, कहाँ गुम गए वोह
बिखरी साँसे, अधूरी धड़कने छोड़ गए वोह
अब तो दर्द दिल में, सदा उनका रहता है
अधूरे खुले दरवाज़ों में, सदा उनको ढूंढ़ता रहता है

कदम अक्सर, उन्ही रास्तो पर चल पड़ते है
के काश मिल जाए, वोह कही तो करार आये

ज़िन्दगी की दौड़ में, अब आगे निकल गया हूँ
अब खवाबों में, तुझे सलाम कर लेता हूँ
जब  पकड़ते हैं जाम, तेरा नाम लेता हूँ
कभी गुजरते हैं उन रास्तो से,
तो दिल अभी भी धड़कता है
के काश मिल जाए, वोह कहीं तो करार आये

उम्र की इस देहलीज़ पर,खवाबों में अब भी मुलाकात होती है
तुझसे मिलने की आस में,अब भी उधर जाना होता है
अपने जनाजे का रास्ता,उधर से ही निकलूंगा
की काश मिल जाए वोह यहीं,तो जाते जाते करार आये

मैं समझ गया यह जिस्मानी नहीं,रूहानी रिश्ता है
बैठा हूँ तेरे इंतज़ार में,खुदा के दर पे
तू  कहीं भी हो तेरी रूह,मुझसे मिलने आएगी ज़रूर
और मेरा करार लाएगी ज़रूर

                                                            --विशाल


This poem is about unfulfilled desire. Most of the people are having desires which are not fulfilled, whether its career, love, parents, money or power. People live their whole life showing themselves as complete to the society, but somewhere in their heart, a deep unfulfilled desire's flame always remain. A strike of single thought , ignites a series of projected events in mind, about our desire. We start feeling happy and satisfied till that thought remain. What a feeling. We remain in dream state and don't want to come out in the real world. Or you can say for some people dream state is real and real world is unreal.

People are quite confident that one day their wish would be fulfilled. 

I am child, youth brings my dream
I am young, middle age brings my dream
I am middle, old age fulfill my dream
I am old, next life I born with my dream


This whole life is dream. Whole life is drama. Nobody is real. Every body is acting. 


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